Part - 12 - Thoughtfull Shayari __Vipin Dilwarya


Thoughtfull Shayari


(1)


ना था मालूम  कि तू इतना बदल जाएगा,,!

एक मेरे गिरने से तू इतना संभल जाएगा,,!!


(2)


ये कोन है जो उँचा उँचा बोल रहा है

इन  फिज़ाओं में  ज़हर  घोल रहा है


(3)


माना सब रिश्तें पराये होते है

लेकिन  भाई  , भाई  होते  है


(4)


मेरे घर का जो सबसे हसीं गहना है,,!

वो मेरी बहना है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!


(5)


जो  रिश्तें  सब  से  खास  होते है 

उनमे सबसे पहले माँ-बाप होते है


(6)


संभालकर रखे थे जो हमनें,

वो सिक्के बांट ले गये


आईना तलाशते रहे हम,

वो  शीशे  काट ले गये


नावाक़िफ़ थे हम 

मिज़ाज-ए-फ़ितरत-ए-इंसाँ से


हम रिश्तें निभाते रह गये, 

वो  हिस्से  बांट ले गये



मिज़ाज-ए-फ़ितरत-ए-इंसाँ - मनुष्य के स्वभाव की अवस्था


(7)


वो  समन्दर* से  भी  गहरे  है,,!

जिनमें कुछ अपनें भी चेहरे है,,!!


(8)


एक पल गम है , एक पल फ़न है

तुम - तुम  हो  ,  तो  हम - हम  है


क्या भरोसा  ज़िन्दगी  का , जीना है 

तो आज जी लो कल तो एक भ्रम है


(9)


महँगा कर लो ख़ुद को अ दोस्त,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!

अक्सर लोग सस्ता समझकर छोड़ दिया करते है!


(10)


इंक़लाब की धरोहर है तू 

आज़ादी  की  मोहर है तू


लेकर चला था  जो  कारवां

उस कारवां की तमोहर है तू


तेरी शहीदी को कैसे भूले हम

आज़ादी-ए-कामिल की डोर है तू



तमोहर - आग , सुर्य 

आज़ादी-ए-कामिल - पूर्ण आज़ादी 




__विपिन दिलवरिया  ( मेरठ )


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